UP T20 लीग मैच फिर शिफ्ट: कानपुर के ग्रीन पार्क की अनदेखी, क्रिकेट प्रशंसकों में नाराजगी

UP T20 लीग मैच फिर शिफ्ट: कानपुर के ग्रीन पार्क की अनदेखी, क्रिकेट प्रशंसकों में नाराजगी

UP T20 लीग मैच फिर शिफ्ट: कानपुर के ग्रीन पार्क की अनदेखी, क्रिकेट प्रशंसकों में नाराजगी 13 जुल॰

ग्रीन पार्क पर फिर छाया सन्नाटा, लखनऊ को मिली सारी चमक

यूपी टी20 लीग के मैच दोबारा से कानपुर के ऐतिहासिक ग्रीन पार्क स्टेडियम की बजाय लखनऊ में शिफ्ट होने से क्रिकेट फैंस का दिल टूट गया है। जिन लोगों ने ग्रीन पार्क की दीवारों पर भारत के दिग्गज खिलाड़ियों को खेलते देखा है, उनके लिए ये फैसला किसी झटके से कम नहीं। इस बार न सिर्फ लीग के नियमित मैच बल्कि प्लेऑफ और फाइनल सब लखनऊ के भारत-रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में होंगे।

कानपुर के क्रिकेट प्रेेमी हमेशा यहां के स्टेडियम में बड़े मुकाबलों की उम्मीद लगाए रहते थे, लेकिन उनका इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। ग्रीन पार्क की गिनती देश के सबसे पुराने और मशहूर क्रिकेट स्टेडियमों में होती है, जहां टेस्ट से लेकर इंटरनेशनल मैचों की बेहतरीन यादें जुड़ी हैं। बावजूद इसके, बड़े आयोजनों के लिए हर बार लखनऊ को तवज्जो दी जा रही है।

कानपुर का जलवा फीका, उपेक्षा की चर्चा तेज

कानपुर का जलवा फीका, उपेक्षा की चर्चा तेज

ये पहली दफा नहीं है, जब ग्रीन पार्क स्टेडियम को इस तरह दरकिनार किया गया हो। आईपीएल हो या यूपी टी20, लखनऊ को बार-बार प्रमुखता देने पर स्थानीय प्रशंसकों में गहरी नाराजगी है। कानपुर का इतिहास बताता है कि यहां के मैदान ने विजय हजारे, मोहम्मद शमी, कुलदीप यादव जैसे नाम दिए हैं। लेकिन जब बात मौकों की आती है, प्रशासन और एसोसिएशन की नजर सिर्फ नई सुविधाओं वाले लखनऊ पर टिक जाती है।

खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए ये स्थिति मायूसी का कारण बन गई है। कई स्थानीय कोच और क्रिकेटर मानते हैं कि इस तरह लगातार टूर्नामेंट हटने से न सिर्फ खिलाड़ी बल्कि ग्रीन पार्क का आकर्षण भी कम हो जाएगा। जबकि स्टेडियम में अब भी बेहतर सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर मौजदू है।

अधिकारियों की तरफ से वजह बताई जा रही है कि लखनऊ में आधुनिक फैसिलिटीज हैं, लेकिन फैंस सवाल कर रहे हैं कि UP T20 लीग जैसे बड़े टूर्नामेंट में कानपुर जैसे शहर को लगातार बाहर क्यों रखा जा रहा है? क्या ये सिर्फ बड़ी सुविधाओं की वजह है या अन्य कारण भी छुपे हैं?

कानपुर प्रीमियर लीग (KPL) 2025 मार्च में होनी है, जिसमें स्थानीय छह टीमों के बीच मैच होंगे। लेकिन इतने सीमित टूर्नामेंट से स्थानीय टैलेंट का भला कितना होगा? यही सवाल अगली पीढ़ी के क्रिकेटर्स के मन में घर कर गया है। जब स्टेडियम और दर्शक तैयार हैं, फिर उन्हें बड़े मुकाबलों से क्यों वंचित किया जा रहा है? फैंस का वही सवाल अब तेज होता जा रहा है—क्या ग्रीन पार्क का सुनहरा दौर यूं ही थम जाएगा, या कभी फिर वापसी होगी?



टिप्पणि (12)

  • Hira Singh
    Hira Singh

    ग्रीन पार्क का जलवा किसी नए स्टेडियम से कम नहीं है! वहां की हवा में ही क्रिकेट की खुशबू है। लखनऊ के नए स्टेडियम तो बस बिल्डिंग हैं, यादें नहीं।

  • Ramya Kumary
    Ramya Kumary

    कभी-कभी इतिहास को बरकरार रखना ही असली प्रगति होती है। ग्रीन पार्क सिर्फ ईंटों और कंक्रीट का ढेर नहीं, ये तो एक जीवित स्मृति है। जिस जगह से शमी और कुलदीप ने अपना सपना शुरू किया, वहीं का अधिकार क्यों छीन लिया जा रहा है?

  • Sumit Bhattacharya
    Sumit Bhattacharya

    स्टेडियम की आधुनिक सुविधाएं जरूरी हैं लेकिन ऐतिहासिक महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कानपुर का योगदान भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अनमोल है

  • Snehal Patil
    Snehal Patil

    ये सब बकवास है। जिन्होंने ग्रीन पार्क को नजरअंदाज किया वो सब बेवकूफ हैं। अब तो ये शहर भी बेकार हो रहा है।

  • Nikita Gorbukhov
    Nikita Gorbukhov

    लखनऊ को प्राथमिकता देना बिल्कुल सही है क्योंकि कानपुर वाले अपने घर के बाहर भी नहीं जाते बस बैठे रहते हैं और शिकायत करते रहते हैं 😂

  • RAKESH PANDEY
    RAKESH PANDEY

    ग्रीन पार्क के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए एक स्पष्ट रोडमैप चाहिए। बस नाराजगी जताने से कुछ नहीं होगा। निवेश, बजट, और टेक्निकल रिपोर्ट्स की जरूरत है।

  • Nitin Soni
    Nitin Soni

    एक दिन जरूर वापसी होगी। यादें नहीं मरतीं। ग्रीन पार्क अभी भी जिंदा है, बस थोड़ा सो रहा है।

  • varun chauhan
    varun chauhan

    मैंने वहां पहली बार लाल चश्मा पहनकर मैच देखा था। अब भी उस दिन की याद दिल को छू जाती है। इसे न भूलो।

  • Prince Ranjan
    Prince Ranjan

    अरे भाई ये सब बातें तो बस एक बड़े बॉस के दोस्तों के लिए हैं जो लखनऊ में घर रखते हैं और अपने बच्चों के लिए एक बड़ा स्टेडियम चाहते हैं बाकी सब तो बस नाराज हैं

  • Suhas R
    Suhas R

    ये सब एक षड्यंत्र है। ग्रीन पार्क को छोड़ने का मतलब है कि कोई बड़ा बिजनेस वाला लखनऊ में जमीन खरीद रहा है। अगला मैच भी बदल जाएगा और फिर बार-बार। इसके पीछे लाखों का लालच है।

  • Pradeep Asthana
    Pradeep Asthana

    तुम लोग इतना रो रहे हो क्यों? ग्रीन पार्क के बाहर भी क्रिकेट खेलो। बच्चों को बाहर निकालो, गेंद और बल्ला लाओ। जमीन है ना? बस नहीं चाहते तो फिर रोते रहो।

  • Shreyash Kaswa
    Shreyash Kaswa

    हमारा देश बड़ा है और हर शहर को बराबर का मौका मिलना चाहिए। लखनऊ को मौका मिल रहा है तो इसका आनंद लो। ग्रीन पार्क का इतिहास हमेशा बना रहेगा।

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