साबरमती एक्सप्रेस पटरी से उतरी, मची अफरातफरी
उत्तर प्रदेश के गोण्डा शहर के निकट, 18 जुलाई 2024 को साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतर जाने की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। दुर्घटना में अब तक कम से कम दो यात्रियों की मौत हो गई है और बीस से अधिक लोग घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन ने हरकत में आकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायल यात्रियों को त्वरित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए दस एंबुलेंस और डॉक्टरों की एक टीम भेजी गई थी।
इस दु:खद दुर्घटना के बाद रेलवे अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने पूरी तत्परता से काम किया। गोंडा के आसपास के अस्पतालों में घायल यात्रियों को भर्ती करवाया गया। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। राज्य राहत आयुक्त नवीन कुमार ने पुष्टि की कि छह कोच पटरी से उतर गए और इनमें से दो कोच बुरी तरह से पलट गए हैं। प्रशासन ने घटना स्थल पर प्राथमिक चिकित्सा के लिए 40 सदस्यीय मेडिकल टीम तैनात की थी।
रेलवे सुरक्षा में दरारें और हादसों का सिलसिला
यह घटना भारत के रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठाती है। पिछले कई वर्षों से देश में ट्रेन दुर्घटनाओं की खबरें लगातार आती रही हैं। बता दें कि पिछले साल पश्चम बंगाल में ट्रेन दुर्घटना में 280 से अधिक लोग मारे गए थे और जून में हुई एक अन्य दुर्घटना में नौ लोगों की जान चली गई थी।
कारणों की जांच और बचाव कार्य
रेलवे के अधिकारी हादसे के कारणों की गहन जांच कर रहे हैं। प्राथमिक छानबीन में स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या यह मानवीय त्रुटि है या तकनीकी खामी। यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बयान लिए जा रहे हैं और दुर्घटना के समय की स्थितियों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि भारत की विशाल रेलवे नेटवर्क में अभी भी कई सुधारों की आवश्यकता है। करीब 64,000 किलोमीटर के ट्रैक पर प्रतिदिन 12 मिलियन से अधिक यात्रियों की आवागमन होती है। ऐसे में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक उपायों की नितांत आवश्यकता है।
साबरमती एक्सप्रेस का सफर
साबरमती एक्सप्रेस चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही थी। यह ट्रेन यात्रियों के बीच काफी प्रसिद्ध है और बड़े पैमाने पर लोगों के आवागमन का एक अहम साधन मानी जाती है। चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ तक के सफर में इसे कई राज्यों और शहरों से होकर गुजरना पड़ता है। यह ट्रेन खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में यात्रा करते हैं।
यात्रियों में भय और अफरातफरी
घटना के बाद ट्रेन के यात्रियों में भारी अफरातफरी मच गई थी। लोगों ने खुद को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की और मदद के लिए चिल्लाते रहे। टीवी फुटेज में दिखाया गया कि कई यात्री पटरी के पास खड़े होकर बचाव दल का इंतजार कर रहे थे।
रेलवे सेफ्टी की दिशा में कदम
भारत सरकार और रेलवे विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। इन उपायों में आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रेन के डिब्बों की नियमित जांच, ट्रैक मेंटेनेंस और चालक दल की ट्रेनिंग शामिल हैं। इसके बावजूद, कई बार तकनीकी खामियों और मानवीय त्रुटियों के कारण हादसे हो जाते हैं।
भविष्य के सुधार और आवश्यक परिवर्तन
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे को अपने सिस्टम में और भी सुधार लाने होंगे। रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक तकनीकों से लैस करना, स्टाफ की नियमित ट्रेनिंग और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। लोगों की जान और माल दोनों को सुरक्षित रखना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
Seemana Borkotoky
ये ट्रेन दुर्घटनाएं अब रोज़ की बात बन गई हैं। लोगों की जान जा रही है, पर कोई सीख नहीं रहा। बस एक बयान आता है, फिर भूल जाते हैं।
Ratanbir Kalra
क्या हम इस देश में जिंदगी को इतना कम कीमती समझते हैं कि ट्रेन के डिब्बे टूट जाएं तो भी कोई नहीं रुकता ये सब चल रहा है तो फिर डर क्यों
Rakesh Joshi
हम इस देश की रेलवे को जीवित रखने के लिए लाखों करोड़ खर्च कर रहे हैं लेकिन अगर इंसानी जिम्मेदारी नहीं होगी तो कोई भी सिस्टम काम नहीं करेगा
Rahul Tamboli
रेलवे का जो बजट है उसमें से एक दिन का हिस्सा भी अगर सुरक्षा पर लगाया जाता तो ये सब नहीं होता 😅 लोगों को तो बस नए ट्रेनों के फोटो चाहिए 📸
Garima Choudhury
ये सब राजनीति है भाई जिसके लिए जो भी बैठा है वो अपना काम कर रहा है लेकिन आम आदमी का दिल टूट रहा है और वो भी जानता है कि कोई नहीं सुनेगा
Jasdeep Singh
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में लागू रखी गई टेक्नोलॉजी डेटा ड्रिवन ऑप्टिमाइजेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम की कमी के कारण ये एक्सीडेंट्स अव्यवहारिक रूप से अक्सर हो रहे हैं जिसका परिणाम जनता के लिए अत्यंत दुखद है
Sarvasv Arora
हर बार जब ये होता है तो सब कुछ बदलने का वादा किया जाता है फिर अगले हफ्ते किसी के बेटे का बिल बढ़ जाता है और फिर याद नहीं रहता। अब तो ये बात बन गई है जैसे बारिश हो जाए तो गली बह जाए।
Puru Aadi
हम इसे बदल सकते हैं अगर हम सब एक साथ आ जाएं। रेलवे के लिए एक अच्छा नियम बनाओ, उसे फॉलो करो, और दूसरों को भी याद दिलाओ 💪❤️
Rohith Reddy
क्या तुम्हें लगता है कि ये दुर्घटना बस एक तकनीकी खामी है? नहीं भाई ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि वो जो बैठे हैं वो अपने घरों में अपने एयरकंडीशनर में बैठे हैं और ये सब उनके लिए बस एक टीवी शो है
Vidhinesh Yadav
क्या किसी ने ये देखा है कि गोंडा के आसपास के ट्रैक्स की लंबाई कितनी है और उनमें से कितने ट्रैक्स पर डिजिटल सिग्नलिंग लगा हुआ है? मुझे लगता है इसकी डीप डेटा जरूरी है
Sumit Bhattacharya
सामाजिक जिम्मेदारी और निर्माण के अंतर्गत रेलवे सुरक्षा के लिए एक व्यवस्थित रूप से अपग्रेडेशन कार्यक्रम की आवश्यकता है जिसमें तकनीकी, मानवीय और प्रशासनिक तत्वों का समावेश हो
Jayasree Sinha
हर दुर्घटना के बाद जो जांच होती है, उसका नतीजा कभी जनता तक नहीं पहुंचता। ये बस एक रिपोर्ट बन जाती है और फाइल में दब जाती है।
Raghav Khanna
हम सभी को इस बात का एहसास होना चाहिए कि रेलवे केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक सामाजिक बंधन है। इसे सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
Ramya Kumary
हम लोग बाहर जाते हैं तो अपने घर की चाबी लगा देते हैं लेकिन जब ट्रेन चलती है तो हम अपनी जान की चाबी कहां रखते हैं? क्या हम इसे किसी के हवाले कर देते हैं?
Nripen chandra Singh
अगर ये दुर्घटना अमेरिका में होती तो उनके पास लाखों डॉलर का निवेश आ जाता और एक हफ्ते में सब कुछ ठीक हो जाता लेकिन हमारे यहां तो बस एक बयान और फिर शांति
Maj Pedersen
हमें यात्रियों के लिए एक अलग बुनियादी ढांचा बनाना होगा जिसमें उनकी सुरक्षा प्राथमिकता हो। ये कोई अनुभव नहीं है ये जीवन है।
Vaibhav Patle
हर एक दुर्घटना के बाद जो भी आता है वो कहता है कि अब सब कुछ बदल जाएगा लेकिन अगली बार जब ये होता है तो फिर वही बातें फिर से शुरू हो जाती हैं 😔 लेकिन मैं विश्वास रखता हूं कि एक दिन हम इसे बदल देंगे 💪
HIMANSHU KANDPAL
इतने सालों से ये हो रहा है और अब तक किसी ने अपने घर के बाहर की रेलवे सुरक्षा के लिए एक चैनल नहीं बनाया ये दुखद है
Hira Singh
अगर हम सब एक दूसरे के लिए थोड़ा जिम्मेदार बन जाएं तो ये दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। बस थोड़ा ध्यान दें और अपने आसपास देखें।