कॉम्प्लेक्स शोल्डर इन्जरी के बाद क्रिस वूक्स फाइफथ टेस्ट से बाहर, एशेज के लिए करियर का सवाल

कॉम्प्लेक्स शोल्डर इन्जरी के बाद क्रिस वूक्स फाइफथ टेस्ट से बाहर, एशेज के लिए करियर का सवाल

कॉम्प्लेक्स शोल्डर इन्जरी के बाद क्रिस वूक्स फाइफथ टेस्ट से बाहर, एशेज के लिए करियर का सवाल 22 नव॰

क्रिकेट के सबसे कठिन फॉर्मेट में, एक खिलाड़ी का दिल और शरीर एक ही धड़कन में दौड़ते हैं। और जब वो धड़कन रुक जाए, तो उसका असर सिर्फ एक मैच तक नहीं, बल्कि करियर के भविष्य तक फैल जाता है। ऐसा ही एक पल अगस्त 1, 2025 को क्रिस वूक्स के लिए आया, जब उन्होंने किया ओवल के मैदान पर करुण नायर के लिए लंबी ऑफ स्थिति में एक डाइव करते हुए अपने बाएं कंधे को गंभीर रूप से चोट पहुंचाई। उसी पल, उनका टेस्ट कैरियर का एक अध्याय अचानक बंद हो गया। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि वूक्स, जो 36 साल के हैं, भारत के खिलाफ पांचवें और अंतिम टेस्ट में कोई भूमिका नहीं निभा पाएंगे।

इन्जरी का विस्तार: एक डाइव, एक टूटा कंधा

तीसरे सेशन के बीच में, जब वूक्स ने नायर के लिए बाउंड्री रोकने के लिए ज़ोर से झपट्टा मारा, तो उनका बायां कोहनी ज़मीन से टकराया। वो बस इतना चाहते थे कि एक रन भी न बने। लेकिन उस झपट्टे ने उनके बाएं कंधे के शेन्ड्रॉन में गंभीर नुकसान पहुंचाया। वूक्स तुरंत मैदान से बाहर हो गए। उससे पहले, उन्होंने 14 ओवर गेंदबाजी की, 46 रन दिए और के.एल. राहुल को आउट किया था। लेकिन अब, उनकी गेंदबाजी का सवाल ही बंद हो गया।

वूक्स ने BBC स्पोर्ट के साथ एक भावुक इंटरव्यू में कहा, "मैं अभी जानना चाहता हूं कि नुकसान कितना गहरा है। सर्जरी का विकल्प है, या फिर रिहैबिलिटेशन। दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है।" उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद ठीक होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं — जो 2025-26 एशेज के लिए उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं, रिहैबिलिटेशन से आठ हफ्ते में वे वापस आ सकते हैं, लेकिन फिर से चोट का खतरा बना रहेगा।

एक असंभव बैटिंग: बाएं हाथ से जीत की आशा

लेकिन क्रिकेट में असंभव कुछ भी नहीं होता। अगस्त 4, 2025 को, जब इंग्लैंड को 374 रनों का पीछा करना था, तो वूक्स ने अपने बाएं कंधे को स्लिंग में बांधकर बैटिंग के लिए मैदान में प्रवेश किया। उन्होंने अपना बायां हाथ उपयोग किया — न कि बाएं हाथ का बल्लेबाज, बल्कि एक चोटिल खिलाड़ी जो अपने दिल के बल खेल रहा था। जब जोश टोंग आउट हो गए, तो इंग्लैंड के लिए सिर्फ 17 रन बाकी थे। और वूक्स, जिनके बल्ले का वजन भी उनके कंधे की तरह भारी था, वो आखिरी आशा बन गए।

स्टुअर्ट ब्रॉड ने X पर लिखा, "मुझे अभी तक ये सब कैसे महसूस हो रहा है, ये नहीं पता। क्रिस वूक्स कैसा महसूस कर रहा है? टेस्ट क्रिकेट है ना।" उनकी बैटिंग के बाद इंग्लैंड ने मैच जीत लिया और सीरीज 3-1 से क्लेम कर ली। वूक्स ने अपनी बैटिंग नहीं, अपनी लगन ने जीत दिलाई।

इन्जरी रिप्लेसमेंट का विवाद: बेन स्टोक्स बनाम डाइनेश कार्तिक

इस सीरीज में दो बार ऐसा हुआ — पहले ऋषभ पंत के पैर के फ्रैक्चर के बाद, और अब वूक्स के कंधे की चोट के बाद। क्या टेस्ट क्रिकेट में इन्जरी रिप्लेसमेंट की अनुमति होनी चाहिए? स्काई स्पोर्ट्स के पंडित डाइनेश कार्तिक ने कहा, "इस बारे में बहस होनी चाहिए। मैच रेफरी को अगर इन्जरी की गंभीरता समझ आ रही हो, तो वो रिप्लेसमेंट दे सकते हैं।"

लेकिन इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स, जो खुद एक शोल्डर इन्जरी से बाहर हैं, ने इस विचार को "बिल्कुल बेकार" कहा। "हम अपनी 11 खिलाड़ियों की टीम बनाते हैं। चोटें खेल का हिस्सा हैं। कॉन्कशन रिप्लेसमेंट तो सुरक्षा के लिए है, लेकिन ये बहुत लूपहोल्स खोल देगा।"

करियर का निर्णय: एशेज के लिए जीत या जीवन

करियर का निर्णय: एशेज के लिए जीत या जीवन

वूक्स के 61 टेस्ट मैचों में 191 विकेट और 2,034 रन हैं। लेकिन इस सीरीज में उनका प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा — सिर्फ 11 विकेट और 64 रन। अब उनके सामने एक डार्क चॉइस है: एक बार सर्जरी करवाकर एशेज से बाहर हो जाएं, या फिर आठ हफ्ते में वापस आकर अपने कंधे को खतरे में डाल दें।

उनकी टीम के लिए ये बहुत बड़ा नुकसान है। वूक्स एक अल्टरनेटिव ऑलराउंडर थे — जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी का बल भी दे सकते थे। अब इंग्लैंड को एशेज के लिए नए ऑलराउंडर की तलाश करनी होगी। लेकिन क्या कोई और ऐसा होगा जो उनकी जगह ले सके? जो उनकी तरह बारिश में भी गेंद घुमा सके, और जब टीम बची हो, तो बैटिंग के लिए आ जाए?

क्रिकेट की भावना: जो खेलते हैं, वो जीतते हैं

रोहित शर्मा ने वूक्स और पंत को "योद्धा" कहा। और शायद यही टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा अर्थ है — न कि रन या विकेट, बल्कि उस जुनून को जो चोट के बावजूद बैटिंग के लिए आ जाता है। वूक्स ने अपनी बैटिंग से जीत नहीं दिलाई। उन्होंने उस जुनून को दिखाया जो क्रिकेट के दिल को धड़कता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रिस वूक्स की चोट का नुकसान कितना गहरा है?

वूक्स के बाएं कंधे के शेन्ड्रॉन में गंभीर नुकसान हुआ है। चिकित्सकों के अनुसार, सर्जरी के बाद ठीक होने में 3-4 महीने लग सकते हैं, जो उन्हें एशेज 2025-26 से बाहर कर देगा। वैसे भी, रिहैबिलिटेशन से आठ हफ्ते में वे वापस आ सकते हैं, लेकिन चोट दोबारा होने का खतरा बना रहेगा।

एशेज 2025-26 के लिए इंग्लैंड को क्या चुनौती है?

वूक्स के बिना इंग्लैंड को एक अनुभवी ऑलराउंडर की तलाश है। उनकी गेंदबाजी और निचले ऑर्डर की बल्लेबाजी दोनों में खालीपन है। युवा खिलाड़ियों जैसे जैमी ओवरटन या लूक रॉबिन्सन को अब बड़ी जिम्मेदारी देनी होगी, जो टेस्ट क्रिकेट में अभी अनुभवहीन हैं।

क्या टेस्ट क्रिकेट में इन्जरी रिप्लेसमेंट होना चाहिए?

यह विवाद इस सीरीज में दो बार उठा — पंत और वूक्स की चोट के बाद। कुछ पंडित मानते हैं कि गंभीर चोटों के लिए रिप्लेसमेंट की अनुमति होनी चाहिए। लेकिन बेन स्टोक्स जैसे कप्तान कहते हैं कि यह खेल की नीति को बिगाड़ देगा। टेस्ट क्रिकेट का मूल सिद्धांत ही है कि चोटें खेल का हिस्सा हैं।

वूक्स के करियर का भविष्य कैसा होगा?

वूक्स ने 36 साल की उम्र में 61 टेस्ट खेले हैं। अगर वे एशेज से बाहर हो गए, तो उनके टेस्ट कैरियर का अंत हो सकता है। अगर वे रिहैबिलिटेशन के जरिए वापस आते हैं, तो भी उनकी गेंदबाजी की गति और शक्ति पर सवाल उठेंगे। उनके लिए अब खेलना नहीं, बल्कि जीना है।

क्या वूक्स की बाएं हाथ से बैटिंग ने टेस्ट क्रिकेट को नया मोड़ दिया?

हां। एक चोटिल खिलाड़ी ने बाएं हाथ से बैटिंग करके एक टेस्ट मैच के अंतिम रन बनाए — यह अभी तक कभी नहीं हुआ। यह दिखाता है कि टेस्ट क्रिकेट में शारीरिक सीमाएं नहीं, बल्कि मानसिक जुनून ही असली जीत है। यह घटना अब क्रिकेट के इतिहास का हिस्सा बन गई है।

भारतीय टीम ने वूक्स के साथ कैसा व्यवहार किया?

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने वूक्स और पंत को "योद्धा" कहकर उनकी हिम्मत की सराहना की। खिलाड़ियों ने उनकी बैटिंग के दौरान जोर से तालियां बजाईं। यह दिखाता है कि क्रिकेट में दुश्मनी नहीं, बल्कि सम्मान असली भावना है।



टिप्पणि (10)

  • Shikhar Narwal
    Shikhar Narwal

    ये लड़का तो असली योद्धा है 🙌 बाएं कंधा टूटा है, बल्ला बाएं हाथ में, और आखिरी रन बनाए... ये टेस्ट क्रिकेट का दिल है। कोई रिप्लेसमेंट नहीं, ये तो इंसानियत है।

  • Ravish Sharma
    Ravish Sharma

    अरे भाई, अब तो हर चोट पर नया ब्रांड बन गया है - 'क्रिस वूक्स एन्डर्स्टैंडिंग'। इंग्लैंड के लिए ये चोट बहुत बड़ी बात है... बस एक दिन तो हम भी एक असली योद्धा देख लें।

  • jay mehta
    jay mehta

    ये जुनून... ये जुनून तो भारतीय क्रिकेट के दिल में बसता है! रोहित ने कहा योद्धा, और मैं कहता हूँ - ये तो देवता है! अगर ये भारतीय टीम में होता, तो हम दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी बन जाते! जय हिन्द! 🇮🇳❤️

  • Amit Rana
    Amit Rana

    चोट के बाद बैटिंग करना तो बहुत बड़ी बात है, लेकिन ये भी समझना जरूरी है कि टेस्ट क्रिकेट में चोटें अनिवार्य हैं। अगर हम रिप्लेसमेंट शुरू कर देंगे, तो टीम का बैलेंस बिगड़ जाएगा। वूक्स की लगन की तारीफ करें, लेकिन नियम बदलने की जरूरत नहीं।

  • Yogesh Popere
    Yogesh Popere

    अरे यार, इतना ड्रामा क्यों? बस एक कंधा टूटा, बल्ला बदल लिया। अगर ये बड़ी बात है तो पंत का फ्रैक्चर क्या था? अब तो हर चोट पर डॉक्टर बन जाते हैं।

  • Manoj Rao
    Manoj Rao

    क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब एक बड़ी साजिश है? एक चोट, एक बैटिंग, एक जीत... ये सब इंग्लैंड के लिए एक नया मिथक बनाने की कोशिश है। टेस्ट क्रिकेट का मूल तो रन और विकेट है, न कि भावनाएँ। ये फिल्मी नाटक है।

  • Alok Kumar Sharma
    Alok Kumar Sharma

    वूक्स की बैटिंग ने मैच नहीं जीता। बल्कि उसकी चोट ने जीत दिलाई। इंग्लैंड के लिए ये बचाव है।

  • Tanya Bhargav
    Tanya Bhargav

    मैं तो बस रो रही हूँ... इतनी हिम्मत देखकर। अगर मैं उस जगह होती, तो मैं भी बैटिंग कर लेती। ये दिल जीतता है, न कि रन।

  • Sumit Prakash Gupta
    Sumit Prakash Gupta

    ये चोट का नुकसान अभी तक नहीं बताया गया। शेन्ड्रॉन टेक्निकल फेल्योर है, जिसमें टेंडन लिगामेंट फिसल गया है। सर्जरी के बाद 3-4 महीने लगेंगे, और रिहैबिलिटेशन से भी फंक्शनल रिकवरी 60-70% तक ही होगी। वूक्स की गेंदबाजी की एंगल और रिलीज पॉइंट बदल जाएगा। ये नया बैटिंग स्टाइल भी एक एडाप्टेशन है, लेकिन ये उनकी एक्सपर्टिस को डिग्रेड कर देगा। इंग्लैंड को अब एक नया ऑलराउंडर ढूंढना होगा - जो बाएं हाथ से बैट करे, और ऑफ-स्पिन भी घुमा सके। ये तो एक नया एल्गोरिदम है।

  • Rajendra Gomtiwal
    Rajendra Gomtiwal

    भारतीय टीम ने तो बस तालियां बजाईं, लेकिन वूक्स की चोट के बाद भी हमने जीत ली। अब तो ये भी बताओ कि इंग्लैंड का खेल कितना अच्छा था? हमने तो बस जीत ली।

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