Ahoi Ashtami – अष्टमी का महत्व और आधुनिक रिवाज

When working with Ahoi Ashtमी, एक प्रमुख हिन्दू तिथि है जो अष्टमी के रूप में मनायी जाती है. Also known as अहूआ अष्टमी, it marks the eighth day of the Navratri cycle and focuses on the bond between siblings. इस दिन लोग माँ दुर्गा की पूजा करते हैं, पारंपरिक उपवास रखते हैं और अपने भाई-बहन के साथ विशेष मिठाई बाँटते हैं।

दुर्गा, जिन्हें Durga, शक्ति की तीर्थिमयी देवी हैं जिनकी अष्टमी पर विशेष पूजा की जाती है, इस तिथि के केंद्र में हैं। Ahoi Ashtami का मुख्य उद्देश्य माँ के शौर्य को स्मरण करना और भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और समर्थन को पुनर्स्थापित करना है। इस संबंध को मज़बूत करने के लिये कई घरों में भाई‑बहन का अन्नपूर्णा भोग तैयार किया जाता है।

मुख्य रिवाज़ और कथा

Navratri, जिसे Navratri, नौ रातों और नौ दिन की औषधिक यात्रा है जो माँ दुर्गा की नौ स्वरूपों का जश्न मनाती है, के आठवें दिन Ahoi Ashtami आता है। इस दिन कथा कहती है कि माता दुर्गा ने महिषासुर को पराजित करने के बाद अपने यश को बँटाने के लिये अपने भाई-बहनों को आशीर्वाद दिया। इसलिए भक्तगण अपने भाई‑बहन को फूल और मिठाई देकर इस आशीर्वाद को पुनः अनुभव करते हैं।

उपवास की बात करें तो मुख्यतः अन्न-रहित जलव्रत रहता है। कई परिवारों में केवल जल और फल का सेवन किया जाता है, जबकि कुछ लोग अंकूर या सखी (सभी अंक) से बने ‘भोग’ को अनुमति देते हैं। इस व्रत से शारीरिक शुद्धि के साथ ही मन की शांति भी मिलती है। उपवास समाप्त होने पर ‘अहूआ लड्डू’ या ‘चूरमा’ का प्रसाद तैयार किया जाता है, जिसे सभी सदस्यों में बाँटा जाता है।

भाई‑बहन के बीच के रिवाज़ में अक्सर ‘राखी’ जैसा एक छोटा लकीर बंधन माना जाता है। इस दिन महिलाओं द्वारा अपने भाइयों को छोटे कागज़ के टुकड़े या रंगीन धागे बाँधे जाते हैं, और भाई सुरक्षा की कसम लेते हैं। इस प्रकार, Ahoi Ashtami सामाजिक बंधनों को भी सुदृढ़ करती है।

भौगोलिक दृष्टि से यह तिथि मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड और बिहार में अत्यधिक लोकप्रिय है। इन क्षेत्रों में ‘उडुंग’ (एक प्रकार का रिवाज) किया जाता है जहाँ महिलाएं अपने घर के बाहर छोटे दीपक जलाते हैं और माँ दुर्गा की कथा गाते हैं। इससे गाँव में सामूहिक ऊर्जा का निर्माण होता है और त्यौहार की खुशियों को साझा किया जाता है।

आधुनिक समय में Ahoi Ashtami को पीछे नहीं छोड़ते हुए कई युवा वर्ग डिजिटल माध्यमों से भी इस तिथि को मनाते हैं। सोशल मीडिया पर #AhoiAshtami हैशटैग के तहत फोटोज़, वीडियो और रेसिपी शेयर की जाती हैं, जिससे इस प्राचीन रिवाज़ को नयी पीढ़ी में भी जीवंत रखा जा रहा है। इस डिजिटल जुड़ाव से छोटे शहरों व गाँवों की परंपराएँ भी अभिव्यक्त होती हैं।

संक्षेप में कहें तो Ahoi Ashtami केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि माँ दुर्गा के शौर्य, भाई‑बहन के प्रेम और शुद्धता के उपवास को एक साथ ले कर चलने वाला एक व्यापक संस्कार है। नीचे दिए गए लेखों में आप इस त्यौहार से जुड़े विस्तृत इतिहास, रीति‑रिवाज़ और समकालीन प्रैक्टिस को और गहराई से पढ़ सकते हैं, जिससे आपके आध्यात्मिक तथा सामाजिक जीवन में नई रोशनी आएगी।

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