रुपया डॉलर के मुकाबले 90 का आंकड़ा पार, प्रियंका गांधी ने BJP पर जमकर निशाना साधा

रुपया डॉलर के मुकाबले 90 का आंकड़ा पार, प्रियंका गांधी ने BJP पर जमकर निशाना साधा

रुपया डॉलर के मुकाबले 90 का आंकड़ा पार, प्रियंका गांधी ने BJP पर जमकर निशाना साधा 8 मई

जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात की, तो माहौल तनावपूर्ण था। उन्होंने भाजपा पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब रुपये का मूल्य डॉलर के मुकाबले गिर रहा है, तो सत्ताधारी पार्टी का जवाब क्या है? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरुवार की सुबह की ट्रेडिंग में भारतीय रुपया पहली बार 90 के आंकड़े को पार कर गया।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 28 पैसे की गिरावट के साथ 90.43 पर पहुंच गया। यह उस समय हुआ जब बुधवार की बंद होने की दर 90.15 थी। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले से पहले हस्तक्षेप कम करने और आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग ने इस गिरावट में भूमिका निभाई। लेकिन यहाँ राजनीति ने अर्थशास्त्र से ज्यादा ध्यान खींचा।

गिरते रुपये पर राजनीतिक चर्चा

प्रियंका गांधी ने सीधे तौर पर वर्तमान सरकार की आलोचना की। उनका कहना था, "कुछ साल पहले जब मनमोहन सिंह के समय डॉलर का मूल्य ऊंचा था, तो इन लोगों ने क्या कहा था? अब उनसे पूछिए कि उनका जवाब क्या है?" उनकी यह टिप्पणी सीधे नरेंद्र मोदी के 2013 के एक भाषण की ओर इशारा करती है।

आठ अगस्त 2013 को, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने तब के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर हमला बोला था। मोदी ने कहा था, "आज हमारी मुद्रा मरने की हालत में है। यह अंतिम अवस्था में है और तुरंत डॉक्टर की जरूरत है।" आज स्थिति उलटी हो गई है, और विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्यों वही लोग चुप हैं जो पहले सबसे तेवर दिखा रहे थे।

सरकार की रक्षा और आर्थिक संकेतक

विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने जीडीपी की अच्छी ग्रोथ, स्वस्थ विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते निवेश की ओर इशारा किया। गोयल का तर्क था कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत अपनी निर्यात और पूंजी प्राप्ति में लचीलापन दिखा रहा है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनन्त नागेस्वर्न ने भी बुधवार को कहा कि रुपये की गिरावट से मुद्रास्फीति या निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा है। इसका मतलब है कि सरकार का मानना है कि यह गिरावट वैश्विक कारकों का हिस्सा है, न कि घरेलू नीति की असफलता।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने इसे एक बड़े वैश्विक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध और टैरिफ दबाव के कारण भारत की मुद्रा पर असर पड़ना अपेक्षित था। यह तर्क है कि समस्या सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक अस्थिरता का हिस्सा है।

  • रुपये की गिरावट: गुरुवार को 90.43 तक पहुंचा, जो कि ऐतिहासिक निचला स्तर है।
  • कारण: आरबीआई का कम हस्तक्षेप और आयातकों की डॉलर की मांग।
  • राजनीतिक पृष्ठभूमि: 2013 में मोदी द्वारा UPA सरकार पर लगाए गए आरोपों का हवाला।
  • सरकारी पक्ष: मजबूत जीडीपी और निर्यात को लेकर आश्वस्त करने वाले आंकड़े।

अगर आप सोच रहे हैं कि यह आपको कैसे प्रभावित करता है, तो याद रखें कि रुपये का कमजोर होना आयातित चीजों जैसे ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों को बढ़ा सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह प्रभाव सीमित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यों भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिर रहा है?

रुपये की गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति के फैसले से पहले कम हस्तक्षेप करना और आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग शामिल है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और अमेरिकी ब्याज दरों का प्रभाव भी देखने को मिल रहा है।

प्रियंका गांधी ने BJP पर क्या आरोप लगाए?

प्रियंका गांधी ने BJP पर दोहरी मापदंड का आरोप लगाया। उन्होंने नोट किया कि जब 2013 में UPA सरकार के समय रुपया गिर रहा था, तो नरेंद्र मोदी ने इसे 'मृत्यु शैया' पर बताया था। अब जब वही स्थिति BJP सरकार के समय है, तो वे चुप हैं, जिस पर प्रियंका ने सवाल उठाए।

सरकार रुपये की गिरावट को लेकर क्या कह रही है?

केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल और मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनन्त नागेस्वर्न का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने दावा किया कि रुपये की गिरावट से मुद्रास्फीति या निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार स्वस्थ हैं।

क्या यह गिरावट आम जनता को प्रभावित करेगी?

रुपये का कमजोर होना आयातित वस्तुओं की कीमतों को बढ़ा सकता है, खासकर ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में। हालांकि, सरकार का मानना है कि मजबूत आंतरिक मांग और निर्यात से यह प्रभाव संतुलित हो जाएगा। फिर भी, दीर्घकालिक रूप से इसका प्रभाव महंगाई पर हो सकता है।