वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी 2025-26 का केंद्रीय बजट
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्तीय वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट को 1 फरवरी 2025 को प्रस्तुत करने जा रही हैं। यह बजट केंद्रीय सरकार की आर्थिक योजनाओं और प्राथमिकताओं का खाका होता है। यह वित्त मंत्री के रूप में सीतारमण का आठवां बजट होगा, और वर्तमान एनडीए 3.0 सरकार के तहत यह उनका दूसरा बजट है। बजट सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उद्घाटन भाषण के साथ 31 जनवरी को हो चुकी है, और पहला सत्र 13 फरवरी तक चलेगा।
बजट 2025 का महत्व
आगामी बजट को बड़ी उम्मीदों से देखा जा रहा है, क्योंकि यह देश की आर्थिक दिशा हेतु अहम निर्णय को परिलक्षित करता है। मध्यम आय वर्ग के लिए कर राहत, उद्योगों में नई निवेश योजनाएं, और महंगाई का नियंत्रण बजट के प्रमुख बिंदु होंगे। यह अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने और रोजगार सृजन में मदद करने के लिए आवश्यक होगा। सरकार द्वारा कृषि, अवसंरचना, और रोजगार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी इन प्राथमिकताओं में शामिल किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथियाँ और समय
वित्त मंत्री का बजट भाषण 1 फरवरी को सुबह 11 बजे आरम्भ होगा। इसे विभिन्न प्लेटफार्म्स जैसे कि टीवी चैनल्स, मोबाइल एप्स, और ऑनलाइन पोर्टल्स पर लाइव देखा जा सकेगा। विशेषकर, जी बिज़नेस न्यूज़ चैनल, संसद टीवी, दूरदर्शन, और इनके विविद मंचों पर इसे सीधा प्रसारित किया जाएगा। बजट सत्र के दोनों चरणों की तिथियाँ 31 जनवरी से 13 फरवरी और 10 मार्च से 4 अप्रैल निर्धारित की गई हैं।
बजट के प्रमुख लक्षित क्षेत्र
बजट में कर राहत के प्रस्ताव मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए राहत लाने की संभावना रखते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि बजट में यह ध्यान विशेष रूप से रखा गया है कि उपभोग को बढ़ावा मिले और मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता में सुधार हो। निवेश और अवसंरचना के क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन, कृषि को आर्थिक मजबूती देने के लिए खास योजनाएँ शामिल हो सकती हैं।
लाइव कवरेज और बजट दस्तावेज
जो व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से वित्त मंत्री का भाषण देखना चाहते हैं, वे इसे लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से देख सकते हैं। इसके अलावा, बजट भाषण के बाद बजट दस्तावेज जल्द ही आधिकारिक केंद्रीय बजट वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। इससे दर्शक सभी वित्तीय जानकारियों और प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
निर्मला सीतारमण का यह बजट भारत की आर्थिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जिसे सभी नजरों से देखा जाएगा। देखें कि सरकार ने नागरिकों के हित में क्या योजनाएँ बनाई हैं और कैसे उन्हें कार्यान्वित किया जाएगा।
Arya Darmawan
बजट में मध्यम आय वर्ग के लिए कर राहत का जिक्र है, ये बहुत अच्छी बात है! लेकिन सिर्फ कर घटाने से नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे में निवेश करके ही असली बदलाव आएगा। मैंने देखा है कि जहां सड़कें, पानी, और बिजली ठीक हैं, वहां लोग खर्च करने को तैयार होते हैं। सरकार को इस दिशा में और ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
HIMANSHU KANDPAL
फिर से वही पुरानी चीजें लाएंगे-कर राहत, किसानों के लिए फंड, और फिर बजट बनाने वाले अपने घरों में बैठे बैंगलोर में विला खरीद लेंगे। क्या आपने कभी सोचा कि ये सब बस एक नाटक है?
Rohith Reddy
बजट क्या है बस एक धोखा जिससे लोगों को लगता है कि सरकार कुछ कर रही है। असल में सब कुछ बैंकों और बड़े उद्योगों के लिए होता है। किसानों को 5000 रुपये देना और बाद में बिजली के बिल दोगुना कर देना-ये है असली नीति।
Rahul Tamboli
बजट? बस एक फोटो शूट है जहां निर्मला जी अपने सूट में खड़ी हैं और लोगों को लगता है कि अब सब ठीक हो जाएगा 😅👑
Garima Choudhury
मुझे लगता है ये सब एक गुप्त योजना है जिसमें बड़े बिजनेस घराने और विदेशी कंपनियां एक साथ बैठकर फैसले ले रही हैं। किसानों को बहुत कुछ देने का नाटक किया जा रहा है लेकिन असल में जमीन लेने के लिए नए कानून बनाए जा रहे हैं।
Puru Aadi
बजट आएगा तो घर पर बैठकर एक कप चाय के साथ देखना है 😊 और फिर दोस्तों के साथ बात करना कि क्या बात हुई! अच्छा है कि अब लाइव स्ट्रीम है, बस बात ये है कि असली बदलाव आएगा या नहीं 😅
Ramya Kumary
बजट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक सामाजिक समझौता है-कि हम किस तरह का देश बनाना चाहते हैं। क्या हम एक ऐसे देश की ओर बढ़ रहे हैं जहां अमीर और गरीब के बीच का फासला बढ़ रहा है? या एक ऐसा जहां हर बच्चे के लिए शिक्षा, हर बुजुर्ग के लिए स्वास्थ्य, हर किसान के लिए न्याय सुनिश्चित है? ये सवाल बजट के पीछे छिपे हैं।
RAKESH PANDEY
मध्यम वर्ग के लिए कर राहत का वादा अच्छा है, लेकिन इसके साथ ही बेसिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार जरूरी है। बिजली का बिल, पानी की कमी, स्कूलों की अनुपलब्धता-ये सब उस बजट के वास्तविक परिणाम हैं जिन्हें लोग रोज महसूस करते हैं।
Vidhinesh Yadav
क्या बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च का अनुपात बढ़ाया गया है? अगर नहीं, तो ये सब बस शब्दों का खेल है। मैंने अपने गांव में देखा है-एक डॉक्टर के लिए 50 किमी चलना पड़ता है। बजट वहीं शुरू होना चाहिए जहां लोग जी रहे हैं।
Hira Singh
जब भी बजट आता है, मैं अपने बच्चे के साथ बैठ जाता हूँ और बताता हूँ कि ये सब क्यों मायने रखता है। बजट सिर्फ नंबर नहीं, ये हमारे भविष्य की कहानी है। आइए उम्मीद रखें और जागें!
Prince Ranjan
बजट का जिक्र करना बेकार है जब तक आपके शहर में गंदगी नहीं उठाई जाती और बस स्टॉप पर बैठकर आपको 2 घंटे इंतजार करना पड़ता है। सरकार को अपने आप को बर्बर बनाने की जरूरत नहीं, बल्कि बुनियादी सेवाएं देने की जरूरत है। बजट बनाने से पहले सड़कें ठीक करो
Nripen chandra Singh
हर साल बजट आता है और हर साल लोग उम्मीद करते हैं कि अब बदलाव आएगा लेकिन असल में कुछ नहीं बदलता क्योंकि सिस्टम ऐसा ही है जो उसी तरह चलता है जैसे दिल धड़कता है बिना किसी जानकारी के और फिर भी हम उसे जीवन का आधार मान लेते हैं जबकि ये बस एक रूटीन है जिसे हमने आदत बना लिया है
varun chauhan
बजट का इंतजार करने की बजाय अगर हम अपने शहर के लोकल बाजार को सपोर्ट करें तो क्या वो भी एक तरह का बजट नहीं होगा? छोटे व्यापारियों को बचाना भी एक बजट है।
Jayasree Sinha
बजट के बारे में चर्चा करने से पहले ये समझना जरूरी है कि यह एक वित्तीय दस्तावेज है, न कि एक राजनीतिक भाषण। इसके तहत आने वाले बजट विवरणों का विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय के साथ तुलना करनी चाहिए, न कि भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के आधार पर।
Snehal Patil
मुझे बस ये देखना है कि क्या मेरी बहन को अब बैंक से लोन मिलेगा या नहीं। बाकी सब बकवास है।
Nitin Soni
मैं बजट के बारे में बहुत उत्साहित हूँ। ये देश के लिए एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। हमें सबको एक साथ आगे बढ़ना होगा। आप भी अपना हिस्सा डालें!
Sumit Bhattacharya
बजट का असली परीक्षण उसके बाद आता है जब ये नीतियां राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वित होती हैं। अगर राज्यों में इसकी लागू करने की क्षमता नहीं है, तो ये सब नकली आशाएं हैं। अधिकारियों की क्षमता और पारदर्शिता इसके लिए जरूरी है।
Nikita Gorbukhov
बजट बनाने वाले खुद अपने बच्चों को निजी स्कूल में भेजते हैं और फिर गांवों में स्कूल बनाने का वादा करते हैं। ये नहीं कि आप बजट बना रहे हैं, आप लोगों को बहका रहे हैं।
Raghav Khanna
हमें बजट के बारे में बात करने के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि इसके कार्यान्वयन में कितनी लचीलापन और निष्पक्षता है। जब तक हम इसे एक निर्माणात्मक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखेंगे, तब तक ये एक बार फिर से एक अवसर के रूप में नहीं बदल पाएगा।
Vaibhav Patle
ये बजट अगर वास्तव में आम आदमी के लिए है तो क्यों नहीं बताया जाता कि ये राशि कहां से आ रही है? ऋण बढ़ाकर नहीं तो लोगों के करों से? अगर ये असली विकास है तो तो इसका अनुमान भी बताओ। 😊