महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरे, किसान बोले- लागत का आधा भी नहीं मिला

महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरे, किसान बोले- लागत का आधा भी नहीं मिला

महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरे, किसान बोले- लागत का आधा भी नहीं मिला 24 अप्रैल

महाराष्ट्र के खेतों में उगे 'लाल सोने' की चमक अब फीकी पड़ गई है। राज्य के किसानों के लिए प्याज की फसल इस बार बड़ा आर्थिक झटका बनकर आई है, जहां कीमतें इतनी गिर गई हैं कि किसान अपनी लागत का आधा हिस्सा भी नहीं निकाल पा रहे हैं। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में प्याज के दाम 300 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक लुढ़क गए हैं, जबकि एक क्विंटल प्याज उगाने की औसत लागत 1,500 से 1,800 रुपये के बीच आती है। हालत यह है कि किसान अब सिर्फ फसल काटने और उसे मंडी तक पहुंचाने का किराया भी नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे वे अपनी उपज को कौड़ियों के भाव बेचने पर मजबूर हैं।

मंडी में मची अफरा-तफरी और किसानों की बेबसी

यह स्थिति सिर्फ एक इलाके की नहीं है, बल्कि राज्य की तमाम कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) में देखी जा रही है। जब उत्पादन लागत 1,800 रुपये हो और बाजार में दाम 300 रुपये रह जाएं, तो समझ लीजिए कि किसान की कमर टूट चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि जिस प्याज के कारण अक्सर आम जनता महंगाई से त्रस्त रहती है, आज वही प्याज उगाने वाला किसान अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।

टूटते दामों ने किसानों को 'डिस्ट्रेस सेल' यानी संकटपूर्ण बिक्री की स्थिति में धकेल दिया है। कई किसान तो खेतों में ही फसल छोड़ने की बात कर रहे हैं क्योंकि मंडी ले जाने का खर्च उठाना अब उनके बस की बात नहीं रही। यह कोई मामूली गिरावट नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हिला सकता है।

सरकार से दखल की गुहार और संघ की चेतावनी

इस संकट को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले का कहना है कि प्याज की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। उनका मानना है कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है कि अब सरकार को बीच में आना ही होगा।

दिघोले और उनकी टीम ने राज्य के शीर्ष नेतृत्व को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें देवेन्द्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार से अपील की गई है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें। किसानों का तर्क है कि जब कीमतें उत्पादन लागत से इतनी नीचे गिर जाएं, तो यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों को सुरक्षा चक्र प्रदान करे।

मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) क्या है और क्यों है जरूरी?

किसानों की सबसे प्रमुख मांग मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) को लागू करने की है। दरअसल, यह स्कीम PM-AASHA (प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान) कार्यक्रम का एक हिस्सा है। यह योजना खास तौर पर उन फसलों के लिए बनाई गई है जिनमें कीमतों में अचानक और भारी गिरावट आती है।

इस स्कीम के तहत सरकार सीधे किसानों से फसल खरीदती है ताकि उन्हें एक लाभकारी मूल्य मिल सके। किसानों का कहना है कि चूंकि वर्तमान स्थिति MIS लागू करने के सभी मानदंडों को पूरा करती है, इसलिए सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में किसान प्याज की खेती से पूरी तरह किनारा कर सकते हैं, जिसका सीधा असर भविष्य में प्याज की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य का संकट

विशेषज्ञों की राय और भविष्य का संकट

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्याज की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव अक्सर देखा जाता है, लेकिन इस बार की गिरावट असामान्य है। इसका मुख्य कारण उत्पादन में बढ़ोतरी और उचित भंडारण (Cold Storage) की कमी हो सकती है। जब बाजार में एक साथ बहुत अधिक आपूर्ति आती है और मांग सीमित होती है, तो कीमतें गिरना स्वाभाविक है। लेकिन समस्या यह है कि हमारे पास कोल्ड स्टोरेज की क्षमता इतनी नहीं है कि हम इस अतिरिक्त उत्पादन को सुरक्षित रख सकें और धीरे-धीरे बाजार में उतारें।

अगर सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती, तो किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। खेती अब एक जुआ बनती जा रही है, जहां निवेश तो बहुत होता है लेकिन मुनाफा केवल किस्मत पर निर्भर करता है।

अगले कदम और उम्मीदें

अगले कदम और उम्मीदें

अब सारी नजरें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं। क्या सरकार PM-AASHA के तहत MIS को लागू करेगी या फिर केवल आश्वासनों तक ही बात सिमट जाएगी? किसानों को उम्मीद है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था या सीधे खरीद प्रक्रिया शुरू करेगी। अगर ऐसा होता है, तो लाखों किसान आर्थिक रूप से उबर पाएंगे।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्याज एक जल्दी खराब होने वाली फसल है। समय निकलता जा रहा है और किसानों के पास अब इंतजार करने की गुंजाइश नहीं बची है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में प्याज की कीमतें इतनी क्यों गिरी हैं?

कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण बाजार में प्याज की अधिक आपूर्ति और पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का अभाव है। जब किसान अपनी फसल एक साथ मंडी में लाते हैं और मांग कम होती है, तो कीमतें 300-800 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर जाती हैं, जो उत्पादन लागत से काफी कम है।

मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) किसानों की मदद कैसे करती है?

MIS योजना के तहत, जब बाजार में किसी विशेष फसल की कीमतें बहुत ज्यादा गिर जाती हैं, तो सरकार खुद उस फसल को किसानों से उचित दाम पर खरीदती है। इससे किसानों को नुकसान से बचाया जा सकता है और उन्हें अपनी मेहनत का सही मूल्य मिलता है। यह PM-AASHA कार्यक्रम का एक हिस्सा है।

किसानों को प्रति क्विंटल कितना नुकसान हो रहा है?

एक क्विंटल प्याज उगाने की लागत लगभग 1,500 से 1,800 रुपये आती है। वर्तमान में किसान इसे केवल 300 से 800 रुपये में बेच पा रहे हैं। इसका मतलब है कि उन्हें प्रति क्विंटल लगभग 700 से 1,500 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है, जिसमें परिवहन का खर्च भी शामिल नहीं है।

किसानों ने किन नेताओं से मदद मांगी है?

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा पवार को ज्ञापन सौंपा है। संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने उनसे तुरंत सरकारी हस्तक्षेप और MIS योजना को लागू करने की मांग की है।